नंदा-सुनंदा महोत्सव: पारंपरिक जयकारों से गूंजा नैनीताल

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अल्मोड़ा/नैनीताल। उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में इन दिनों मां नंदा की भक्ति और लोक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। एक ओर चमोली में मां नंदा की बड़ी जात यात्रा धार्मिक उल्लास के साथ आगे बढ़ रही है, तो दूसरी ओर कुमाऊं के नैनीताल और अल्मोड़ा में नंदा देवी महोत्सव की धूम मची हुई है। नंदाष्टमी के अवसर पर शनिवार को अल्मोड़ा के ऐतिहासिक नंदा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वहीं नैनीताल के मां नयना देवी मंदिर में मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं की विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसके साथ ही पूरा सरोवर नगरी मां के जयकारों से गूंज उठी। नैनीताल में कुमाऊं की आराध्य मां नंदा-सुनंदा के आगमन के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। मां नयना देवी मंदिर में शनिवार को विधि-विधान के साथ मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की गई। प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। भक्तों की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तड़के तीन बजे से ही श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचने लगे थे। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कुमाऊं की लोक मान्यता में मां नंदा-सुनंदा को बेटी के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि उनके मायके यानी कुमाऊं आगमन से लेकर विदाई तक पूरा क्षेत्र भावनाओं और भक्ति से जुड़ा रहता है।

23 सितंबर को निकलेगा भव्य डोला, झील में होगा विसर्जन
नैनीताल के नंदा देवी महोत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण 23 सितंबर को होने वाला मां नंदा-सुनंदा का भव्य डोला होगा। इस दौरान मां की प्रतिमाओं को नगर भ्रमण कराया जाएगा। नगर भ्रमण में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। नगर भ्रमण के बाद मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं का नैनी झील में विसर्जन किया जाएगा। कुमाऊं की लोक परंपरा में यह क्षण बेहद भावुक माना जाता है। मान्यता है कि मां नंदा-सुनंदा अपने मायके आती हैं और फिर धार्मिक अनुष्ठानों के बाद उन्हें ससुराल के लिए विदा किया जाता है। मां के आगमन से लेकर विदाई तक नैनीताल में धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति की भी झलक देखने को मिलती है। मंदिर परिसर से लेकर नगर के विभिन्न हिस्सों तक मां नंदा-सुनंदा के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।

अल्मोड़ा में नंदाष्टमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब
कुमाऊं की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा में भी नंदाष्टमी के अवसर पर शनिवार को मां नंदा देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। ऐतिहासिक नंदा देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और मां से परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में पूरे दिन श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। नंदा देवी के प्रति गहरी आस्था के चलते आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूरस्थ इलाकों से भी लोग दर्शन के लिए पहुंचे। अल्मोड़ा का नंदा देवी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कुमाऊं की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मेले की परंपरा करीब चार सौ वर्ष पुरानी मानी जाती है। मान्यता के अनुसार, चंद राजाओं के शासनकाल में मां नंदा देवी की मूर्ति नगर के मल्ला महल में स्थापित थी। बाद में अंग्रेजी शासन के दौरान तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर ट्रेल के समय मूर्तियों को वहां से हटाकर चंद राजाओं द्वारा निर्मित उद्योत चंद्रेश्वर शिव मंदिर में स्थापित किया गया। इसके बाद यह स्थान नंदा देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। समय के साथ नंदा देवी मेला अल्मोड़ा की धार्मिक परंपरा के साथ-साथ यहां की लोक संस्कृति और सामाजिक जीवन का भी अभिन्न हिस्सा बन गया।