Mar 23, 2026

डिप्लोमा इंजीनियर्स ने मुख्यमंत्री को सौंपा 27 सूत्रीय मांग पत्र! पुरानी पेंशन बहाली और वेतन विसंगति मुख्य मुद्दा

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देहरादून। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के द्वादश द्विवार्षिक महाधिवेशन के अवसर पर प्रदेश भर के इंजीनियरों ने अपनी लंबित समस्याओं को लेकर हुंकार भरी है। महासंघ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा है, जिसमें वेतन विसंगतियों से लेकर पुरानी पेंशन योजना की बहाली जैसे 27 गंभीर मुद्दों को रेखांकित किया गया है।

वेतन विसंगति का समाधानः
कनिष्ठ अभियंताओं के लिए 4600 का प्रारंभिक ग्रेड पे 01.01.2006 से काल्पनिक आधार पर देने की मांग की गई है ताकि ड्राफ्ट्समैन और जेई के वेतन में समानता खत्म हो सके।
पुरानी पेंशन की बहालीः महासंघ ने प्रदेश के इंजीनियरों के लिए एनपीएस और यूपीएस के स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर से लागू करने की पुरजोर वकालत की है।
पदोन्नति के अवसरः पदोन्नति में हो रहे ठहराव को देखते हुए मांग की गई है कि सेवाकाल में कम से कम 3 पदोन्नतियां सुनिश्चित की जाएं या एसीपी के रूप में 10ए 16 और 26 वर्ष की सेवा पर उच्च ग्रेड पे (5400, 6600, 8700) दिया जाए।
गैर-तकनीकी कार्यों से मुक्तिः इंजीनियरों ने नाराजगी व्यक्त की है कि उनसे परीक्षा पर्यवेक्षक, कांवड़ मेला और चारधाम यात्रा में घोड़े-खच्चर गिनने जैसे गैर-तकनीकी कार्य कराए जाते हैं। उन्होंने इन ड्यूटी पर रोक लगाने की मांग की है ताकि वे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर ध्यान दे सकें।
सुरक्षा और बीमाः दुर्गम क्षेत्रों और आपदा राहत कार्यों में तैनात इंजीनियरों के लिए 2.00 करोड़ तक के सामूहिक दुर्घटना बीमा की सुविधा मांगी गई है।
अन्य मांगेंः बायोमेट्रिक उपस्थिति से छूट, जल संस्थान व जल निगम का राजकीयकरण/एकीकरण और नए नियुक्त इंजीनियरों के लिए लैपटॉप की उपलब्धता जैसी मांगें भी शामिल हैं।

विकास की रीढ़ हैं इंजीनियर
महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि डिप्लोमा इंजीनियर्स राज्य निर्माण और विकास की असली रीढ़ हैं, लेकिन वेतन विसंगति और पदोन्नति की कमी के कारण संवर्ग में भारी असंतोष है। महासंघ ने स्पष्ट किया कि यदि इन 27 मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो इंजीनियरों की कार्यक्षमता पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना निश्चित है।