धार्मिक अध्ययन के प्रतिष्ठित चेहरों को विशेषज्ञ समिति में शामिल करेगा अल्पसंख्यक विभाग

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उत्तराखंड सरकार राज्य के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को सुधारने और छात्रों के सुनहरे भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में अब एक नए और आधुनिक शिक्षा मॉडल को लागू करने की कवायद तेज हो गई है। इसके तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए धार्मिक और मूल्यपरक शिक्षा से जुड़े पूरे पाठ्यक्रम (सिलेबस) को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। इस नए पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक संस्कारों के साथ-साथ छात्रों को समकालीन वैज्ञानिक और व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना है। इसके लिए जल्द ही उच्च स्तरीय विषयवार विशेषज्ञ समितियों का गठन किया जाएगा, जिसमें शिक्षा, धार्मिक अध्ययन और संबंधित क्षेत्रों के प्रतिष्ठित दिग्गजों को जगह मिलेगी।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा इस नए शैक्षणिक ढांचे को लेकर पहले ही कई दौर की विस्तृत बैठकें और चर्चाएं की जा चुकी हैं। विभाग ने निर्णय लिया है कि कक्षा 9 से 12वीं तक के लिए जो नया पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा, उसमें विषय विशेषज्ञों के साथ-साथ अल्पसंख्यक समाज के प्रतिष्ठित धार्मिक गुरुओं और बुद्धिजीवियों को भी विशेष रूप से शामिल किया जाएगा। यह समितियां अलग-अलग विषयों, आधुनिक बाजार की जरूरतों और छात्रों के मानसिक विकास के आधार पर एक संतुलित पाठ्यक्रम का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार करेंगी और अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगी। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया को मुकम्मल करने के लिए अभी कोई अंतिम समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन विभाग का प्रयास है कि इस काम को जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाए ताकि नए सत्र से छात्र इसका लाभ उठा सकें। इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी खूबी यह है कि नए पाठ्यक्रम में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सभी महत्वपूर्ण प्रावधानों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि विभाग द्वारा अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में कक्षा 8वीं तक के आधुनिक पाठ्यक्रम को पहले ही सफलतापूर्वक तैयार किया जा चुका है और अब यह आगे की बड़ी कवायद है।  पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ-साथ सरकार ने पारंपरिक मदरसों के आधुनिकीकरण को लेकर भी एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला किया है। राज्य के सभी मदरसों के प्रबंधकों, संचालकों और शिक्षकों को आधुनिक शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए एक व्यापक 'राज्यव्यापी जनजागरूकता अभियान' चलाया जाएगा। इस विशेष अभियान के तहत मदरसों में पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान, कंप्यूटर और गणित जैसे विषयों के प्रभावी समन्वय पर पूरा जोर दिया जाएगा। यह जनजागरूकता अभियान अल्पसंख्यक कल्याण प्राधिकरण के सदस्यों के नेतृत्व में और जिला प्रशासन के सक्रिय सहयोग से प्रदेश के सभी जनपदों (जिलों) में एक साथ चलाया जाएगा। अभियान के दौरान मदरसा संचालकों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा, रोजगारपरक वोकेशनल कोर्सेज और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं की बिंदुवार जानकारी दी जाएगी, ताकि वे बिना किसी हिचकिचाहट के इसे अपना सकें।