झारखंड छात्र आंदोलन: पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे छात्र

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रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को उस समय और तेज हो गया, जब रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच करीब पांच घंटे तक तीन दौर में चली मैराथन वार्ता बेनतीजा रही। सरकार की ओर से छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें मानने का दावा किए जाने के बावजूद आंदोलनकारी JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और पूरी परीक्षा प्रक्रिया की CBI जांच कराने की मांग पर अड़े रहे। वार्ता विफल होने के बाद छात्र संगठनों ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का फैसला किया। सुबह से ही बड़ी संख्या में छात्र और आंदोलनकारी पुरानी विधानसभा के पास जुटने लगे। आंदोलनकारी संगठनों ने छात्रों से किसी भी तरह के बहकावे में नहीं आने और शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा की ओर मार्च करने की अपील की। इसके बाद छात्र संगठित होकर नई विधानसभा की ओर पैदल मार्च पर निकल पड़े। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा और मांगों से जुड़े पोस्टर-बैनर नजर आए। छात्र लगातार सरकार से उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील करते रहे। छात्र आंदोलन में पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो भी विधानसभा मार्च में शामिल हुए। लंबे समय से अनशन पर रहने के कारण उनकी हालत कमजोर बताई गई और वह खुद चलने की स्थिति में नहीं थे। ऐसे में साथी छात्रों ने उन्हें अपने कंधों पर उठाकर मार्च में शामिल किया। प्रदर्शन स्थल पर छात्रों ने फूल बरसाकर देवेंद्र महतो का स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने तिरंगा भी लहराया। अनशनकारी छात्र को कंधे पर उठाकर आगे बढ़ते छात्रों की तस्वीर आंदोलन के दौरान चर्चा का विषय बनी रही।

सात बैरिकेडिंग में छह पार, आखिरी पर पुलिस ने संभाला मोर्चा
विधानसभा घेराव को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। नई विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में, झारखंड हाईकोर्ट को छोड़कर, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 लागू की गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती के साथ विधानसभा की ओर जाने वाले रास्तों पर कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्र एक के बाद एक बैरिकेडिंग पार करते चले गए। सुरक्षा व्यवस्था के तहत लगाए गए सात बैरिकेड में से छह को प्रदर्शनकारियों ने पार कर लिया। जब छात्र सातवीं और आखिरी बैरिकेडिंग तक पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल शुरू कर दिया। पानी की बौछार के बीच भी प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। कई छात्र वाटर कैनन की बौछार में ही नारे लगाते और डांस करते नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई के बीच नारे लगाए—‘और चलाओ, और चलाओ।’ आखिरी बैरिकेड टूटने की स्थिति में प्रदर्शनकारियों के विधानसभा परिसर की ओर आगे बढ़ने की आशंका के चलते पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहे।

पांच घंटे की वार्ता में नहीं निकला समाधान
रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की बातचीत हुई। करीब पांच घंटे चली इस वार्ता में सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा शामिल हुए। सरकार ने बातचीत के दौरान दावा किया कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं। सरकार की ओर से 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और ACF परीक्षा को रद्द करने, TDPL एजेंसी की ओर से आयोजित परीक्षाओं की जांच कराने तथा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने जैसी मांगों पर सहमति की बात कही गई। हालांकि छात्र प्रतिनिधियों का कहना था कि उनकी सबसे प्रमुख मांग JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना और पूरी प्रक्रिया की CBI जांच कराना है। इन दोनों मांगों पर सहमति नहीं बनने के कारण वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।