उत्तराखंड में 40 घंटे से 'आफत' की बारिश: अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन, उफनती नदियों में बही गाड़ियां, 91 सड़कें बंद

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देहरादून। उत्तराखंड में मौसम का मिजाज एक बार फिर आफत बनकर बरसा है। प्रदेश भर में बीते करीब 40 घंटे से जारी मूसलाधार बारिश ने पहाड़ से लेकर मैदान तक जनजीवन की रफ्तार पूरी तरह रोक दी है। उफनते नदी-नाले, जगह-जगह भूस्खलन और जलभराव के बीच राज्य भर में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। देहरादून, ऋषिकेश, पौड़ी, टिहरी, चमोली और रुद्रप्रयाग समेत कई जिलों में प्रशासनिक तंत्र और एसडीआरएफ की टीमें हाई अलर्ट पर हैं।

उत्तराखंड में करीब 40 घंटे से लगातार हो रही बारिश ने पहाड़ से मैदान तक जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार बारिश के कारण नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, कई इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन ने सड़कों पर आवाजाही रोक दी है। ऋषिकेश, देहरादून, पौड़ी, टिहरी, चमोली और रुद्रप्रयाग समेत कई जिलों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बारिश के बीच अलग-अलग घटनाओं में लोगों को रेस्क्यू करना पड़ा, जबकि पौड़ी के मेहरगांव में मकान ढहने से एक बच्चे की मौत हो गई। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के बुलेटिन के अनुसार बारिश, भूस्खलन और अन्य कारणों से प्रदेश में दो राज्यमार्ग समेत कुल 91 सड़कें बंद हैं। प्रशासन और संबंधित विभाग जेसीबी व अन्य मशीनरी की मदद से बंद मार्गों को खोलने में जुटे हैं। लगातार बारिश के कारण ऋषिकेश के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। कई सड़कें और गलियां पानी में डूब गईं। चंद्रभागा नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई। तेज बहाव में कई वाहन फंस गए और कुछ गाड़ियां बहते हुए मुख्य नदियों तक पहुंच गईं। एसडीआरएफ की टीमों ने कई वाहनों को निकालने का अभियान चलाया। प्रशासन ने लोगों से नदी, नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की है। गंगा के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। देहरादून में यूपीईएस के छह छात्र थान गांव मिसरास पट्टी स्थित स्वारना नदी क्षेत्र में ट्रेकिंग के लिए पहुंचे थे। ट्रेकिंग पूरी करने के बाद जब छात्र वापस लौट रहे थे, तभी अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के कारण स्वारना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। उफनती नदी को देखते हुए छात्रों के लिए वापस लौटना मुश्किल हो गया और वे जंगल के बीच फंस गए। सूचना मिलने के बाद राहत एवं बचाव दल सक्रिय हुआ और छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई की गई। पशुलोक बैराज पुलिस चौकी से रात करीब 9:22 बजे सूचना मिली कि बीन नदी में एक मैक्स वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया है और उसमें लोग फंसे हुए हैं। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। जवानों ने बिना समय गंवाए बचाव अभियान शुरू किया और कड़ी मशक्कत के बाद वाहन में फंसे एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पौड़ी जिले के कोटद्वार-द्वारीखाल क्षेत्र के मेहरगांव यानी भलगांव में भारी बारिश के बीच एक मकान ढह गया। हादसे के बाद चार लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना से हड़कंप मच गया। प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। ग्रामीणों की मदद से एक महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत-बचाव अभियान के दौरान एक बच्चे का शव बरामद हुआ। मौके पर एंबुलेंस और मेडिकल टीम भेजी गई। क्षेत्र में कई मकानों को खतरा बताया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। बारिश और भूस्खलन के कारण अल्मोड़ा में पांच, बागेश्वर में 12, चमोली में 15, चंपावत में एक, देहरादून में सात, नैनीताल में 12, पौड़ी में पांच, पिथौरागढ़ में 11, रुद्रप्रयाग में सात तथा टिहरी और उत्तरकाशी में आठ-आठ मार्ग बाधित हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-534 पर भी कई स्थानों पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ है। रपटों में पानी का बहाव बढ़ने से आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है। चमोली के ज्योतिर्मठ स्थित उर्गम घाटी में पांचवें केदार भगवान कल्पेश्वर महादेव मंदिर के पास भारी भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से आए मलबे ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को प्रभावित किया है। मलबा आने से मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। वहीं रुद्रप्रयाग में केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन की घटना में कई लोगों के घायल होने और एक व्यक्ति की मौत की सूचना है। लगातार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं के बीच पौड़ी जिलाधिकारी तत्काल आपदा कंट्रोल रूम पहुंचीं और जिले के अलग-अलग हिस्सों के हालात की समीक्षा की। बैरगांव में भूस्खलन से घायल महिला को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सतपुली स्थित हंस चिकित्सालय पहुंचाया। डीएम ने बाधित सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने तथा बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सेवाओं की लगातार निगरानी के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों से बारिश के दौरान विशेष एहतियात बरतने की अपील की है। उन्होंने नदी-नालों के किनारे जाने, तेज बहाव वाले रास्तों को पार करने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने को कहा है। लगातार बारिश ने एक बार फिर उत्तराखंड की भौगोलिक संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, बंद सड़कों को खोलने और बिजली-पानी समेत जरूरी सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की है। आने वाले घंटों में बारिश और नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की निगरानी बनी रहेगी।