एसआईआर डिजिटल अभियान: मतदाताओं और बूथ अधिकारियों दोनों को मिलेगी हाईटेक प्लेटफार्म की सुविधा

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निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को एक महीने के मोबाइल रिचार्ज के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह निर्णय विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता गणना प्रपत्रों को डिजिटल स्वरूप में बदलने की प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि उत्तराखंड में वर्तमान में 11,733 बूथ लेवल ऑफिसर तैनात हैं। आयोग ने इन सभी बीएलओ को मोबाइल डाटा रिचार्ज के लिए 350 रुपये की राशि देने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं ताकि अभियान के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान शुरू हो चुका है। इसके तहत 8 जून से 7 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना फॉर्म वितरित करेंगे। इसके बाद मतदाताओं द्वारा भरे गए प्रपत्रों को बीएलओ अपने मोबाइल में उपलब्ध बीएलओ एप के माध्यम से डिजिटलाइज करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में इंटरनेट डाटा की आवश्यकता को देखते हुए आयोग ने मोबाइल रिचार्ज की व्यवस्था की है। निर्वाचन विभाग का मानना है कि डिजिटल माध्यम से गणना प्रपत्रों का संकलन और अपलोडिंग होने से मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। साथ ही इससे भविष्य में चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं को भी सरल और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतदाताओं को भी अब बीएलओ का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। इच्छुक नागरिक स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपना एसआईआर फॉर्म भरकर अपलोड कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर जाकर ईसीआई नेट मोबाइल एप डाउनलोड करना होगा। वेबसाइट पर उपलब्ध एसआईआर फॉर्म लिंक पर क्लिक करने के बाद मतदाता को अपना वोटर आईडी नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद राज्य का चयन कर आवश्यक जानकारी भरनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने पर फॉर्म ऑनलाइन जमा किया जा सकेगा। उत्तराखंड के लिए यह ऑनलाइन सुविधा 8 जून से सक्रिय कर दी जाएगी। चुनाव आयोग की यह पहल न केवल बीएलओ के कार्य को आसान बनाएगी, बल्कि मतदाताओं को भी डिजिटल सुविधा का लाभ देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य में तेजी आएगी और चुनावी प्रक्रिया में तकनीक का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। प्रदेशभर में शुरू होने जा रहे इस अभियान को लेकर निर्वाचन विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र मतदाता का विवरण समय पर अपडेट हो और किसी भी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटने न पाए। डिजिटल इंडिया की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए चुनाव आयोग का यह कदम निर्वाचन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।