Apr 23, 2026

स्थानांतरण अधिनियम में विचलन की शक्ति: क्या सरकार देगी कर्मचारियों को तबादलों में बड़ी राहत?

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देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आ रही है। प्रदेश में लंबे समय से अटके अनिवार्य तबादलों और स्थानांतरण अधिनियम की जटिलताओं को दूर करने के लिए शासन स्तर पर कवायद शुरू हो गई है। वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 की धारा-27 के प्रावधानों में ढील देने या परिवर्तन करने के लिए कल, यानी 24 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है।

तबादलों की राह में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन करेंगे। पहले यह बैठक 20 अप्रैल को प्रस्तावित थी, लेकिन अब यह कल संपन्न होगी। कार्मिक विभाग इस बैठक में धारा-27 के क्रियान्वयन में आने वाली व्यवहारिक दिक्कतों, अधिनियम के प्रावधानों में विचलन, और विशेष परिस्थितियों में छूट देने जैसे बिंदुओं पर गंभीर विचार-विमर्श करेगा। स्थानांतरण अधिनियम की धारा-27 सरकार को यह शक्ति देती है कि वह विशेष परिस्थितियों में अनिवार्य तबादलों की प्रक्रिया में परिवर्तन या छूट दे सके। प्रदेश में काफी समय से इस धारा के तहत तबादले नहीं हो पाए हैं। इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ रहा है जो गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं और सुगम क्षेत्रों में उपचार की सुविधा चाहते हैं। पारिवारिक या अन्य अति-आवश्यक कारणों से स्थानांतरण का इंतजार कर रहे हैं। अनिवार्य स्थानांतरण की श्रेणी में आते हैं लेकिन तकनीकी कारणों से रुके हुए हैं। प्रदेश के हजारों कर्मचारियों की नजरें कल होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं। तबादलों के न होने से कई विभागों में कार्य संस्कृति पर भी असर पड़ रहा है और कर्मचारियों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। यदि कल की बैठक में प्रावधानों में राहत देने पर सहमति बनती है, तो उन कर्मचारियों के लिए रास्ता साफ हो जाएगा जिनका तबादला मानवीय आधार पर बेहद जरूरी है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद कार्मिक विभाग तबादलों के लिए नई गाइडलाइन्स या संशोधित दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। शासन का प्रयास है कि अधिनियम की मूल भावना से समझौता किए बिना उन प्रावधानों में लचीलापन लाया जाए, जो वर्तमान में बाधा बने हुए हैं। कल होने वाले इस निर्णय से न केवल सचिवालय बल्कि जिला स्तर के कार्यालयों में भी बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।