देवभूमि ऋषिकेश में सुशासन और पर्यावरण अनुकूल विकास पर राष्ट्रीय महापौरों का ऐतिहासिक मंथन

Blog
 Image

योग और अध्यात्म की नगरी ऋषिकेश में आज से देश के शहरी विकास और सुशासन को एक नई दिशा देने वाले महामंथन की शुरुआत हो गई है। अखिल भारतीय महापौर परिषद की 117वीं कार्यकारी समिति की इस बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक में शामिल होने के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विशेष रूप से पहुंचे। देश के अलग-अलग राज्यों और प्रमुख शहरों से आए महापौरों (मेयर्स) की मौजूदगी के चलते इस आयोजन ने राष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। 

इस दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में देशभर के विभिन्न महानगरों और शहरों के महापौर हिस्सा ले रहे हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य आधुनिक भारत के शहरों को स्मार्ट, आत्मनिर्भर और जन-अनुकूल बनाना है। कार्यक्रम के दौरान देशभर से आए इन जनप्रतिनिधियों के बीच शहरी विकास की नई तकनीकों, सुशासन , ठोस कचरा प्रबंधन, और सीधे जनता से जुड़े कल्याणकारी मुद्दों पर बेहद गंभीर और व्यापक मंथन किया जा रहा है। अलग-अलग शहरों के सफल प्रयोगों और 'बेस्ट प्रैक्टिसेज' को एक-दूसरे के साथ साझा किया जा रहा है, ताकि उन्हें देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सके। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देशभर से आए अतिथियों का देवभूमि में स्वागत किया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप आज उत्तराखंड में आधुनिक शहरी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। हमारी सरकार शहरों को व्यवस्थित करने के साथ-साथ जनकल्याणकारी योजनाओं को निरंतर गति दे रही है।" सीएम धामी ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए कैसे पहाड़ों और मैदानों के शहरों का सतत विकास किया जा रहा है, यह आज पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन रहा है। परिषद की इस 117वीं बैठक को स्थानीय निकायों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बैठक से जो निष्कर्ष और सुझाव निकलेंगे, वे आने वाले समय में देश की शहरी नीति को प्रभावित करेंगे। कार्यक्रम के दौरान ऋषिकेश और आस-पास के क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की भी सराहना की गई। देशभर के मेयरों का यह जमावड़ा न केवल विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाएगा, बल्कि देवभूमि के पर्यटन और संस्कृति को भी राष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान देगा।