सेवानिवृत्ति तक एक साथ तीन बड़े विभागों को संभालकर निदेशक मुकुल सती ने पेश की मिसाल

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देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। विभाग में लंबे समय से प्रतीक्षित अधिकारियों के बंपर तबादलों  की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। शासन स्तर पर व्यापक फेरबदल के लिए एक मजबूत विभागीय प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसे अब अनुमोदन के लिए विभागीय मंत्री के पास भेज दिया गया है। जैसे ही माननीय मंत्री की ओर से इस फाइल पर हरी झंडी मिलेगी, वैसे ही शिक्षा निदेशालय से लेकर जिलों तक अधिकारियों को इधर से उधर करने के धड़ाधड़ आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

शिक्षा विभाग में यह प्रशासनिक सर्जरी इसलिए भी अनिवार्य हो गई है क्योंकि विभाग इस समय अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। सोमवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती अपनी सरकारी सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो रहे हैं। डॉ. सती की सेवानिवृत्ति के बाद विभाग के भीतर शीर्ष स्तर पर एक बड़ा शून्य पैदा होने जा रहा है। दरअसल, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक का पद पिछले काफी समय से खाली चल रहा था और डॉ. मुकुल सती ही इसका अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। इतना ही नहीं, उनके पास 'समग्र शिक्षा' के अंतर्गत अपर राज्य परियोजना निदेशक की भी बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी। सोमवार के बाद विभाग में निदेशक के तीन स्वीकृत पदों में से दो पद पूरी तरह खाली हो जाएंगे, जिससे विभागीय कामकाज और नीतिगत फैसलों की रफ्तार पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। कमी सिर्फ शीर्ष स्तर पर ही नहीं, बल्कि मध्यवर्ती प्रशासनिक ढांचों में भी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो विभाग की स्थिति काफी गंभीर दिखती है। विभाग में अपर निदेशक के कुल 10 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 5 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। संयुक्त निदेशक के कुल 23 पदों में से अधिकांश पर वर्तमान में कोई स्थाई तैनाती नहीं है। उच्च स्तर पर इतनी बड़ी रिक्तियों के कारण अब शिक्षा निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों और जिला शिक्षा अधिकारियों को बड़े पैमाने पर इधर से उधर करने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। समीक्षा और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उच्च स्तर पर पात्र और वरिष्ठ अधिकारियों की भारी कमी को देखते हुए सरकार कुछ जूनियर लेकिन योग्य अधिकारियों को प्रमोट कर सकती है। रिक्त पड़े महत्वपूर्ण पदों पर काम सुचारू रूप से चलाने के लिए इन्हें 'प्रभारी' के रूप में बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल का मुख्य उद्देश्य आगामी सत्र में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही सुस्ती को दूर करना है। अब सभी की नजरें शिक्षा मंत्री के दफ्तर पर टिकी हैं, जहां से वीआईपी रजामंदी मिलते ही उत्तराखंड शिक्षा विभाग का नया प्रशासनिक खाका सामने आ जाएगा।