देहरादून। देहरादून में ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ नॉन-गजेटेड ऑफिसर्स ऑफ ऑर्डिनेंस एंड इक्विपमेंट फैक्ट्रीज एंड क्वालिटी एश्योरेंस ऑर्गनाइजेशंस (AIANGOS) की राष्ट्रीय परिषद (JCM-II) की एक महत्वपूर्ण बैठक नई दिल्ली में संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में संगठन के राष्ट्रीय सचिव एवं रक्षा मंत्रालय के सचिव अजय ने भाग लिया, जहां रक्षा कर्मचारियों और मुख्य रूप से नव-नियुक्त असैन्य अधिकारियों की विभिन्न गंभीर समस्याओं पर गहन चर्चा की गई। बैठक के दौरान राष्ट्रीय सचिव अजय ने रक्षा मंत्रालय के सचिव के समक्ष कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 60 वर्ष बनाए रखने की मांग को प्रमुखता से उठाया और सेवा नियम 56(J) के तहत होने वाली अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे दमनकारी नियमों से कर्मचारियों के भविष्य और उनके मनोबल पर गहरा नकारात्मक असर पड़ रहा है। इसके साथ ही संगठन ने सरकार के सामने अपनी 9 सूत्रीय मुख्य मांगें भी रखीं, जिसमें 7वें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करते हुए 8वें वेतन आयोग का गठन करने, रक्षा क्षेत्र में 4 साल की सीमित भर्ती प्रक्रिया को बंद कर स्थायी नियुक्ति करने, न्यू पेंशन स्कीम (NPS) को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने, मृतक आश्रितों को तुरंत नौकरी देने तथा वर्क लोड के अनुसार नई भर्तियां शुरू करने की मांग शामिल है। कर्मचारियों ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण का विरोध करते हुए इन्हें पूर्व की भांति आयुध निर्माण बोर्ड (OFB) कोलकाता के तहत लाने, MACP में 6-12-18-24 वर्ष के स्टेप से पदोन्नति देने और सी.एम. कैडर को एस.आर.ओ. के अनुसार ₹4600 ग्रेड पे (लेवल-8) देने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई। मंत्रालय के सचिव ने संगठन द्वारा उठाए गए इन सभी मुद्दों को बेहद गंभीरता से लिया और आश्वस्त किया कि रक्षा उत्पादन विभाग (DDP) के तहत काम करने वाले किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के कल्याण के लिए सरकार उचित कदम उठाएगी।
इसके साथ ही उन्होंने फील्ड यूनिट्स और विभिन्न फैक्ट्रियों के महाप्रबंधकों (GMs) तथा सीएमडी (CMDs) को कड़े निर्देश दिए कि वे स्थानीय स्तर पर संगठन के प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करें ताकि समस्याओं का निवारण सुगमता से हो सके। बैठक में AIANGOS के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं। यदि प्रशासन या अधिकारियों द्वारा उनकी इन जायज मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो संगठन विरोध और पूर्ण बहिष्कार जैसे कड़े कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा। इस बैठक में ओएलएफ शाखा के पदाधिकारियों सहित संगठन के कई प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने एकसुर में कर्मचारियों की आवाज को मजबूत करने का संकल्प लिया। इसी कड़ी में नॉर्थ जोन के अध्यक्ष गिरीश चंद्र उप्रेती की अध्यक्षता में एक वर्चुअल मीटिंग का आयोजन किया गया। इस बैठक में नॉर्थ जोन के सचिव नरेश राठौर, धर्मेंद्र, सचिन, कुलदीप सिंह और सुदेश कुमार गौतम ने भाग लिया। बैठक के दौरान आगामी रणनीति और कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा की गई। साथ ही अध्यक्ष गिरीश चंद्र उप्रेती ने दूसरे संगठनों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे कर्मचारियों के हितों के बीच में चुगलखोरी करना बंद करें। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि कुछ संगठनों का काम सिर्फ चुगलखोरी करना रह गया है, उन्हें इस तरह की हरकतों से बाज आना चाहिए। बैठक के अंत में सभी पदाधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों और आने वाली समस्याओं के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया।

