पिथौरागढ़। जल स्रोतों और नदियों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने तथा जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शनिवार को पिथौरागढ़ जिले के कासनी ग्राम स्थित सेरादेवल मंदिर परिसर में भव्य नदी महोत्सव का आयोजन किया गया। स्वजल विभाग एवं स्प्रिंग एंड रिवर रिजूविनेशन अथॉरिटी (सारा) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दर्जा राज्यमंत्री गणेश भण्डारी, जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत व्यापक वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान से हुई। मुख्य अतिथि, जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, 130 इको टास्क फोर्स के प्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, देव सिंह इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं तथा ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से पौधरोपण किया। इसके साथ ही मंदिर परिसर और नदी तट पर स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छ पर्यावरण का संदेश दिया गया। इसके बाद सेरादेवल मंदिर स्थित चन्द्रभागा और देवभागा नदियों के पवित्र संगम पर विधि-विधान के साथ नदी पूजन एवं दीपदान किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ मुख्य समारोह का शुभारंभ हुआ, जबकि देव सिंह इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। सारा के सदस्य सचिव भरत सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। उन्होंने बताया कि सारा वैज्ञानिक पद्धति से जल स्रोतों और नदियों के पुनर्जीवन का कार्य कर रहा है। उन्होंने "धारा मेरा, नौला मेरा, साफ प्रयास मेरा संकल्प" अभियान तथा "एक जनपद-एक नदी" योजना के तहत रामगंगा नदी सहित जाखनी, यशवन्ती, गुरघटिया, घरीगाड़, लिनगाड़ और ऐतिहासिक नौलों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उपजिलाधिकारी जितेन्द्र वर्मा ने कहा कि सावन माह में किया गया वृक्षारोपण प्रकृति संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। वहीं 130 इको टास्क फोर्स के कर्नल गौरव नेगी ने कहा कि स्वस्थ नदी का आधार उसका प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र है और इसे सुरक्षित रखने में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भूमिका आवश्यक है।
प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष सिंह ने कहा कि सरकार के सहयोग से जल स्रोतों और नदियों के पुनर्जीवन के लिए कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, लेकिन इन प्रयासों की सफलता जनसहभागिता पर निर्भर करती है। उन्होंने लोगों से संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। ब्लॉक प्रमुखों ने भी जल स्रोतों के संरक्षण, नदियों की स्वच्छता और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल पर विशेष जोर दिया। इस अवसर पर देव सिंह इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण और रासायनिक प्रदूषण पर आधारित प्रभावशाली रोल प्ले प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को जागरूक किया। मुख्य अतिथि दर्जा राज्यमंत्री गणेश भण्डारी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान और "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान का उल्लेख करते हुए सभी नागरिकों से कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल और पर्यावरण संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने कहा कि नदी महोत्सव केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में दुनिया के करोड़ों लोग जल संकट का सामना कर रहे हैं और वर्ष 2050 तक जल की मांग में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान है। ऐसे में अभी से प्रभावी और सामूहिक प्रयास करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, चाल-खालों का पुनर्जीवन, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली और जल स्रोतों की सुरक्षा को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देना होगा। कार्यक्रम के अंत में चित्रकला प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। सभी वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए अधिकाधिक वृक्षारोपण और नदियों को स्वच्छ रखने का सामूहिक संकल्प दोहराया।

