नैनीताल जिले के विश्व प्रसिद्ध गिरिजा देवी (गर्जिया) मंदिर के अस्तित्व को बचाने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। मंदिर के मुख्य टीले को मजबूती देने के लिए चल रहे सुदृढ़ीकरण कार्यों के कारण अब श्रद्धालु 30 मई तक मुख्य मंदिर में दर्शन नहीं कर सकेंगे। सिंचाई विभाग ने सुरक्षा कारणों और निर्माण कार्य की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य मंदिर तक आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
गर्जिया मंदिर का मुख्य टीला काफी समय से खतरे की जद में है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अजय कुमार जॉन के अनुसार, साल 2010 की भीषण बाढ़ के बाद से ही टीले में दरारें आनी शुरू हो गई थीं, जो धीरे-धीरे बढ़ती गईं। मंदिर की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए वर्तमान में दूसरे चरण का कार्य तेजी से चल रहा है। निर्माण के दौरान नदी के भीतर करीब 5 मीटर तक खुदाई की जा रही है, जहाँ पानी का लगातार रिसाव हो रहा है। ऐसे में काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें ऊपर टीले पर जाने से रोका गया है। भले ही मुख्य मंदिर तक पहुंच बंद है, लेकिन श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को देखते हुए मंदिर समिति और प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था की है। श्रद्धालु मंदिर परिसर के दूसरे छोर पर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में माता रानी की चरण पादुका के दर्शन कर पुण्य कमा सकते हैं। प्रशासन ने अपील की है कि भविष्य में इस आस्था के केंद्र को सुरक्षित रखने के लिए श्रद्धालु विभाग का सहयोग करें। अधिशासी अभियंता ने बताया कि पहले 30 अप्रैल तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन काम अभी 'हाई फ्लड लेवल' (HFL) तक नहीं पहुंच पाया है। विभाग का लक्ष्य मानसून आने से पहले टीले के चारों ओर मजबूत सुरक्षा दीवार और कंक्रीट संरचना तैयार करना है। यदि कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ, तो प्रतिबंध की अवधि को 15 जून तक भी बढ़ाया जा सकता है। नदी के बीचों-बीच स्थित इस संवेदनशील क्षेत्र में खुदाई और कंक्रीट का काम सावधानी से किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौके का मुआयना कर रहे हैं ताकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।

