देवभूमि उद्यमिता योजना: पिथौरागढ़ में तीन दिवसीय आवासीय बूट कैंप शुरू, युवाओं को स्टार्टअप और स्वरोजगार की दी जा रही प्रशिक्षण

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पिथौरागढ़। उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी क्रम में भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआई इंडिया), अहमदाबाद द्वारा ईटीसी थरकोट, पिथौरागढ़ में तीन दिवसीय आवासीय उद्यमिता बूट कैंप का शुभारंभ उत्साहपूर्वक किया गया। इस प्रशिक्षण शिविर में राजकीय महाविद्यालय गंगोलीहाट, बलुआकोट, मुवानी, एसएनएस राजकीय परास्नातक महाविद्यालय तथा एलएसएम कैंपस पिथौरागढ़ के कुल 50 चयनित छात्र-छात्राएं प्रतिभाग कर रहे हैं। बूट कैंप का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमशीलता की सोच विकसित करना और उन्हें स्वरोजगार एवं स्टार्टअप की दिशा में प्रेरित करना है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को व्यवसायिक अवसरों की पहचान, स्टार्टअप की स्थापना, वित्तीय प्रबंधन, विपणन रणनीति, व्यवसाय विस्तार, डिजाइन थिंकिंग, बिजनेस आइडिया डेवलपमेंट, मार्केट एनालिसिस, फाइनेंस एंड फंड्स, विभिन्न सरकारी योजनाओं, पिचिंग स्किल्स और गो-टू-मार्केट रणनीतियों की व्यावहारिक जानकारी विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही है। कार्यक्रम में मौजूद ईडीआई इंडिया के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और क्षेत्रीय उत्पादों पर आधारित उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। प्रतिभागियों ने भी इस प्रशिक्षण को अपने करियर और व्यक्तिगत विकास के लिए बेहद उपयोगी बताया तथा कहा कि इससे उन्हें स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास मिलेगा। कार्यक्रम का संचालन ईडीआई इंडिया के उद्यमिता विशेषज्ञ डॉ. रजत शर्मा के नेतृत्व में किया जा रहा है। देवभूमि उद्यमिता योजना के टिहरी गढ़वाल के प्रोजेक्ट अधिकारी दिग्विजय सिंह, चमोली के प्रोजेक्ट अधिकारी विनोद नेगी तथा उद्यमिता विशेषज्ञ अश्विनी तिवारी ने विद्यार्थियों को उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं ईटीसी थरकोट के ईटीओ पंकज पंत ने आयोजन के सफल संचालन हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं। आयोजकों का कहना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं में नवाचार और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करते हैं तथा उन्हें नौकरी मांगने के बजाय रोजगार उपलब्ध कराने वाला उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे उत्तराखंड में उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।