गंगोलीहाट। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की ग्राम पंचायत ओलीगांव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरस रही है। सड़क स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होने से ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। ग्राम प्रधान रीना देवी ने जिलाधिकारी पिथौरागढ़ को पत्र भेजकर दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण आंदोलन को मजबूर होंगे। पत्र के अनुसार मुख्य मार्ग एनएच-309 से ओलीगांव के लिए सड़क मार्ग पहले ही स्वीकृत हो चुका है, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण यह मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। विभाग द्वारा फॉरेस्ट फाइल (वन विभाग की अनुमति) की औपचारिकता का बहाना बनाया जा रहा है। वहीं ग्राम प्रधान का दावा है कि सर्वे के अनुसार इस मार्ग में कहीं भी वन भूमि या वन पंचायत की भूमि नहीं आ रही हैए फिर भी जानबूझकर देरी की जा रही है।
6 किलोमीटर का पैदल सफर और पलायन का दर्द
गांव की भौगोलिक स्थिति और समस्याओं का जिक्र करते हुए पत्र में बताया गया है कि सड़क न होने के कारण बीमार व्यक्तियों को अस्पताल तक पहुंचाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कहा गया है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गांव के लोग तेजी से पलायन कर रहे हैं। कहा कि मुख्य मार्ग से गांव की दूरी 6 किलोमीटर है, जिसे ग्रामीणों को पैदल तय करना पड़ता है। पत्र में बताया गया कि जनता पिछले 6 वर्षों से सड़क की मांग कर रही है, लेकिन लगातार अनदेखी हो रही है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि मार्च माह तक सभी औपचारिकताएं पूरी कर सड़क निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं किया गया, तो क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधि मुख्य मार्ग पर चक्का जाम और उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान होने वाली किसी भी अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।