Feb 05, 2026

गंगोलीहाटः 18 किलोमीटर का फासला और विकास का शून्य! 9 हजार आबादी के सब्र का बांध टूटा

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गंगोलीहाट। उत्तराखंड के सीमांत जनपदों में विकास के दावों की जमीनी हकीकत देखनी हो, तो गंगोलीहाट तहसील के डंडे क्षेत्र का रुख कीजिए। तहसील मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर की दूरी पर बसा यह क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए आदिम युग जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। शिक्षा के मंदिर में गुरु नहीं हैं, तो बीमारों के लिए अस्पताल और आर्थिक लेन.देन के लिए बैंक का नामोनिशान नहीं है। अब क्षेत्र की 9,000 की आबादी ने एकजुट होकर हुंकार भरी है। क्षेत्र के भविष्य कहे जाने वाले राजकीय इंटर कॉलेज, डंडे की स्थिति सबसे दयनीय है। कॉलेज में प्रधानाचार्य का पद रिक्त होने से प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। अभिभावकों का कहना है कि जब विद्यालय का मुखिया ही नहीं है, तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा? ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में अपनी पीड़ा बताई। कहा कि 9,000 लोगों के बीच एक भी बैंक शाखा नहीं है। पेंशनभोगियों और छोटे व्यापारियों को 18 किमी दूर मुख्यालय जाना पड़ता है, जिससे उनका पूरा दिन और पैसा बर्बाद होता है। क्षेत्र में एक भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। प्रसव या आपातकालीन बीमारी की स्थिति में डोली या निजी वाहनों के सहारे मुख्यालय तक का सफर जानलेवा साबित हो सकता है। पशुपालन पर टिकी अर्थव्यवस्था वाले इस क्षेत्र के पशु चिकित्सा केंद्र में फार्मासिस्ट तक नहीं है। बीमार पशुओं का इलाज अब झाड़-फूंक या निजी खर्च पर निर्भर है। तहसील से मात्र 18 किमी की दूरी तकनीकी रूप से कम हो सकती है, लेकिन सुविधाओं के मामले में यह फासला दशकों पुराना लगता है। प्रधान मनोहर सिंह ने कहा कि हम टैक्स देते हैं, वोट देते हैं, लेकिन जब सुविधा की बात आती है तो हमें 18 किमी दूर भेज दिया जाता है। यह ज्ञापन सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि बोकटा क्षेत्र की जनता की आखिरी उम्मीद है। ज्ञापन देने वालों में प्रधान मनोहर सिंह, शिवानी, गोकुल सिंह, दयाल नाथ, रेखा देवी, कमला देवी आदि मौजूद रहे।