गंगोलीहाट। हिमालयन ग्राम विकास समिति, गंगोलीहाट के तत्वावधान में तीन दिवसीय 'साइंस आउटरीच कार्यक्रम' का भव्य आगाज हुआ। इस कार्यक्रम में पिथौरागढ़, चंपावत और बागेश्वर जनपदों के 15 विद्यालयों से आए 100 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. बी.डी. लखचौरा, डॉ. कंचन पांडे और अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर समिति द्वारा प्रकाशित पुस्तक "वॉयस ऑफ हिमालया" का विमोचन भी संपन्न हुआ। आईआईटी के प्रो. डॉ. कंचन पांडे ने छात्रों को संबोधित करते हुए अंकों की अंधी दौड़ के बजाय सीखने और समझने पर जोर दिया। संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए साइंस आउटरीच कार्यक्रम के इतिहास और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
बौद्धिक सत्र और वैज्ञानिक चर्चाएं
प्रथम सत्र में पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रो. बी.डी. लखचौरा ने "द यूनिटी एंड डायवर्सिटी ऑफ लाइफ" विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कोशिकीय स्तर पर सूक्ष्म जीवाणुओं से लेकर विशाल बहुकोशिकीय जीवों तक, जीवन की जटिलताएं एक व्यवस्थित संगठन में कार्य करती हैं। वहीं, भटनागर पुरस्कार से सम्मानित प्रो. डॉ. कंचन पांडे ने 'पेलिओथर्मोमेट्री' विषय पर चर्चा करते हुए तापमान मापने वाले विभिन्न उपकरणों और उनके मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी दी। उन्होंने मौसम एवं वातावरण के बदलावों को मापने की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया।
प्रायोगिक प्रदर्शन और जटिल सिद्धांतों की व्याख्या
जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस साइंस रिसर्च (JNCASR), बैंगलोर के प्रो. डॉ. एन.एस. विद्याधीरजा ने 'हैंड्स ऑन एक्टिविटी' के माध्यम से भौतिक विज्ञान के कठिन नियमों जैसे बर्नोली का प्रयोग, सेंट्रर ऑफ मास, एयर प्रेशर और विमानों के उड़ने के सिद्धांतों को सरलता से समझाया। उन्होंने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन, एड्डी करंट और सुपर कंडक्टिव मैग्नेटिक लेविटेशन ट्रेन के कार्य मॉडल का भी प्रदर्शन किया। इसी क्रम में JNCASR की प्रो. शिबा वासू ने जटिल जैविक प्रक्रियाओं को सरल मॉडल के जरिए समझने पर अपना व्याख्यान दिया। कार्यक्रम के संचालन में पंतनगर विश्वविद्यालय के संयुक्त निदेशक प्रो. आनंद सिंह जीना की मुख्य भूमिका रही। इस अवसर पर प्रो. कुशाय बंसल, डॉ. जयश्री सनवाल, प्रो. रजनी विश्वनाथ सहित विभिन्न जनपदों के शिक्षक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

