मुख्यमंत्री धामी का संदेश, चारधाम यात्रा में आने वाले मेहमानों का सत्कार हमारी परंपरा

Blog
 Image

देवभूमि उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस समय अपने चरम पर है। देश और दुनिया के कोने-कोने से लाखों की संख्या में सनातनी श्रद्धालु बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं के इस अभूतपूर्व उत्साह को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कमान खुद संभाल ली है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य सरकार का मुख्य संकल्प यह सुनिश्चित करना है कि देवभूमि आने वाले हर एक श्रद्धालु को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम दर्शन का सुखद अनुभव प्राप्त हो।

सीएम धामी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि भीड़ के इस भारी दबाव के बीच यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं से कोई समझौता न किया जाए। यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही और उनके बेहतर स्वास्थ्य को सरकार ने अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और पैदल मार्गों को ध्यान में रखते हुए यात्रा रूट पर पुख्ता चिकित्सा इंतजाम किए गए हैं। किसी भी श्रद्धालु को अचानक तबीयत बिगड़ने पर तुरंत इलाज मिल सके, इसके लिए पूरे यात्रा मार्ग पर विशेष चिकित्सा वाहनों (एम्बुलेंस) को तैनात किया गया है। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस बार की चारधाम यात्रा को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए मुख्यमंत्री धामी ने एक विशेष ब्लूप्रिंट तैयार किया है, जिसके तहत मुख्य रूप से दो मोर्चों पर कड़ाई से काम किया जा रहा है। तीर्थयात्रियों को यात्रा मार्गों और तीर्थस्थलों पर पूरी तरह शुद्ध, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन मिले, इसके लिए विशेष फूड सेफ्टी (खाद्य सुरक्षा) टीमों को फील्ड पर उतारा गया है। ये टीमें लगातार होटलों और ढाबों की चेकिंग कर रही हैं। नाजुक हिमालयी पर्यावरण की रक्षा के लिए इस बार 'हरित यात्रा' का संकल्प लिया गया है। यात्रा मार्गों पर सिंगल यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूरी तरह रोकने के लिए 'रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल' के सिद्धांत को कड़ाई से लागू किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल यात्रा को लेकर देश-विदेश के सनातनियों में जो भारी उत्साह दिख रहा है, वह ऐतिहासिक है। सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि आस्था के इस महासमागम में अव्यवस्था की कोई गुंजाइश न रहे। उन्होंने स्थानीय जनता और व्यापारियों से भी अपील की है कि वे उत्तराखंड की पारंपरिक 'अतिथि देवो भव' की भावना के साथ तीर्थयात्रियों का स्वागत और सहयोग करें, ताकि पूरी दुनिया में देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता का सकारात्मक संदेश जाए।