गंगोलीहाट। 'उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन' और 'ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन' के आह्वान पर गंगोलीहाट क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकत्रियों ने प्रभारी चिकित्साधिकारी गंगोलीहाट के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर अविलंब न्यूनतम वेतन, पेंशन तथा नियमितीकरण की मांग उठाई है। आशा कार्यकत्रियों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा राजकीय चिकित्सालयों में कामकाज ठप रखकर अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगी।
मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में आशा कार्यकत्रियों ने कहा कि उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग उनके श्रम के बल पर चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन, कर्मचारी दर्जा और पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ जहां सरकार विधायकों और जन प्रतिनिधियों के वेतनों में लगातार बढ़ोतरी कर रही है, वहीं दिन-रात मातृ शिशु सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी आशा कार्यकत्रियों को दैनिक मजदूरों से भी कम मानदेय दिया जा रहा है। यूनियन ने स्मरण दिलाया कि पूर्व में खटीमा स्थित कैंप कार्यालय में वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा आशाओं को 11,500 रुपये प्रति माह मानदेय देने तथा डीजी हेल्थ द्वारा नियत मानदेय का प्रस्ताव लागू करने का वादा किया गया था। हालांकि, लंबा समय बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हो सका है।
ज्ञापन के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं ने प्रमुख रूप से मांग रखी है कि 11,500 रुपये मानदेय देने के वादे को तत्काल लागू किया जाए, आशाओं को राज्य कर्मचारी घोषित कर उनका नियमितीकरण किया जाए, सेवानिवृत्त होने पर पेंशन व एकमुश्त धनराशि का प्रावधान किया जाए और सभी अस्पतालों में उनके सम्मानजनक व्यवहार के साथ सुरक्षित कार्य माहौल सुनिश्चित किया जाए। आशा कार्यकर्ता संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष उमा मेहरा एवम् आशा कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि आगामी चुनाव से पूर्व उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो उग्र अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

